शहर में कल होगा मुहर्रम का जुलुस और मातम


  • शहर में कल होगा मुहर्रम का जुलुस और मातम
    शहर में कल होगा मुहर्रम का जुलुस और मातम
    इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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नागपुर : इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर शिया मुस्लिम समुदाय इसे गम के महीने के तौर पर मनाते हैं। मुहर्रम में ताज़िया बनाया जाता है जो बाँस की कमाचिय़ों पर रंग-बिरंगे कागज, पन्नी आदि चिपका कर बनाया हुआ मकबरे के आकार का वह मंडप होता है जो मुहर्रम के दिनों में मुसलमान / शिया लोग हजरत इमाम हुसेन की कब्र के प्रतीक रूप में बनाते है और जिसके आगे बैठकर मातम करते हुवे मर्सिये पढ़ते हैं। शहर के मोमिनपुरा में कल ताजिया जुलुस निकालकर मातम किया जाएगा। बता दे ताजिया हजरत इमाम हुसैन कि याद में बनाया जाता है।

इस्लाम में कुछ लोग इस कि आलोचना करते है मगर ये ताजियदारी बहुत शान से होती है। भारत के कई क्षेत्रों में हिन्दू भी, इस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते है और ताजिया बनाते है, जिसके चलते आज शहर के चितार ओली में कुछ छोटे बच्चो को शेर के रूप में रंगाया गया । बताया जाता है की मन्नत पूरी होने पर बच्चो को मुहर्रम के एक दिन पहले शेर के रूप में रंगाकर जुलूस में शामिल किया जाता है । मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। मुहर्रम का पूरा महीना बेहद खास माना जाता है, लेकिन इस महीने का १०वां दिन सबसे अहम मानते जो कल है । इस दिन को रोज-ए-आशुरा कहते हैं। इस बार रोए-आशुरा मंगलवार यानी कल१० सितंबर को है।



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